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Apr 26, 2013

रुके न तू , झुके न तू ....(हरिवंश राय बच्चन )


धरा  हिला , गगन  गूंजा !
नदी  बहा , पवन  चला !
विजय  तेरी , वजह  तेरी !
ज्योत  सी  जल , जल  जला!
भुजा  भुजा, फड़क  फड़क !
रक्त  में , धड़क  धड़क !
धनुष  उठा , प्रहार  कर !
तू  सबसे  पहले  वार कर !
अग्नि  सी  धधक  धधक !
हिरन  सी  सजग  सजग !
सिंह  सी  धाहड़ कर !
शंख  सी  पुकार  कर !
रुके  न  तू , थके  न  तू !
झुके  न  तू , थामे  न  तू !
सदा  चले , थके  न  तू !
रुके  न  तू , झुके  न  तू !

Jul 11, 2012

जूनून....


किसी को मोहब्बत का है जूनून ,
किसी को अदावत का है जूनून ,
कोई मुफलिसी का मारा हुआ ,
किसी को दौलत का है जूनून,
जाने ये कैसी है दीवानगी ,
कंधे पे लादे हुए जिन्दगी ,
भटकता हु मैं बे-सबब बे-निशान ,
मेरे साथ है मेरी आवारगी ,
कहाँ दिल जले को सुकून चाहिए ,
जूनून के लिए बस जूनून चाहिए....

Feb 24, 2012

ज़माने बीत जातें हैं....

कभी नजरें मिलाने में ज़माने बीत जाते हैं,
कभी नजरें चुराने में ज़माने बीत जाते हैं,
किसी ने आंख भी खोली तो सोने की नगरी में ,
किसी को घर बनाने में ज़माने बीत जाते हैं,
कभी काली गहरी रात एक पल की लगती है,
कभी एक पल बिताने में पूरी रात बीत जाती है,
कभी खोला दरवाजा तो सामने थी मंजिल,
कभी मंजिल को पाने में ज़माने बीत जाते हैं,
कभी एक पल में टूट जाते हैं उम्र भर के रिश्ते,
वो रिश्ते जिन्हें बनाने में ज़माने बीत जाते हैं....