कितनी आसानी से दुनिया की गिरह खोलता है
मुझ में इक बच्चा बुज़ुर्गों की तरह बोलता है
Mar 18, 2017
चलते चलते (२४)
इन्हें जो भी बनाते हैं वो हम तुम ही बनाते हैं
किसी मज़हब की साज़िश में कभी बच्चे नहीं होते।।
चलते चलते (२२)
अजनबी शहर के अजनबी रास्ते,मेरी तन्हाई पर मुस्कुराते रहे
मैं बहुत देर तक यूँ ही चलता रहा,तुम बहुत देर तक याद आते रहे।
Mar 1, 2017
Feb 25, 2017
Tomato Soup for heart (3)
I forgive people. It doesn't mean I accept their behavior or trust them again. I forgive them for me, so I can let go and move on with my life.
गुफ्तगू (8)
अपना जीवन निहाल कर लेते, औरों का भी ख़याल कर लेते!
जब भी पूछो हो हमसे पूछो हो, आज ख़ुद से सवाल कर लेते!
दिल पे जादू है बस मुहब्बत का, आप भी यह कमाल कर लेते!
गर न उन पर नजर तेरी होती, लोग क्या अपना हाल कर लेते!
मौत के जाल से निकलते तो, ज़िंदगी को बहाल कर लेते!
ए 'कुँअर' ख़ुद पे भी नज़र रखते, अपनी भी देखभाल कर लेते!!
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