The book truly justified the title.....
Jan 11, 2015
Review of "Accidental Prime Minister by Sanjay Baru"
The book truly justified the title.....
Dec 17, 2014
गुफ्तगू (5)
रहेनुमा अपने को जो भी बताते फिरते थे , सच तो ये है हम उनकी शय से बहुत डरते थे ।
नाम लेते थे वो दीनो धर्म का कुछ इस तरह , इबादत गाह मे भी कत्ल किया करते थे ।
RIP#Peshawar kids
Dec 11, 2014
गुफ्तगू (4)
मेरे कारनामा-ऐ-जिंदगी मेरी हसरतों के सिवा कुछ नहीं...
यह किया नहीं...वो हुआ नहीं...यह मिला नहीं...वो रहा नही......
Dec 6, 2014
Nov 20, 2014
चलते चलते(12)
"कुछ अजीब हैं राहें, जिनपर चल रहें हैं हम.... हर नये
मोड़ पर लगता हे, बदल रहे हैं हम...!"
Nov 15, 2014
गुफ्तगु (2)
था कभी प्यार का हसीन मौसम तेरे शहर में
आज किस बात का है मातम तेरे शहर में...
हर कोई खुश है बेहिसाब मेरे क़त्ल के बाद
क्यूँ क़ातिल मना रहा है ग़म तेरे शहर में...
शीशे तो खौफ खाते ही हैं पत्थरों से लेकिन
पत्थरों का क्यूँ निकला है दम तेरे शहर में...
नज़दीक से गुज़र गया वो ज़ख्म दिए बगैर
शायद बाकी है पत्थरों में शरम तेरे शहर में...
इंसानियत की पीठ में घोंपे मज़हबों के खंज़र
लोग करते रहे अल्लाह पे सितम तेरे शहर में...
ये मत समझ लेना इक मौत से डर गया हूँ मैं
लेकर आऊँगा फिर अगला जनम तेरे शहर मै...