Jan 11, 2015

Review of "Accidental Prime Minister by Sanjay Baru"

Just finished reading "Accidental Prime Minister by Sanjay Baru". A decent book that helps us understanding Dr. Manmohan Singh in a balanced and impartial way. After rearing the book I can say that may be politics wasn't kind to him but history will always b kind to him. It doesn't matter whether he will be in active politics or not but Indian economy and politics will owe him a lot.
The book truly justified the title.....

Dec 17, 2014

गुफ्तगू (5)

रहेनुमा अपने को जो भी बताते फिरते थे , सच तो ये है हम उनकी शय से बहुत डरते थे ।
नाम लेते थे वो दीनो धर्म का कुछ इस तरह , इबादत गाह मे भी कत्ल किया करते थे ।
RIP#Peshawar kids

Dec 11, 2014

चलते चलते (14)

यूं न पढ़िए कहीं कहीं से हमें,
हम इंसान हैं, किताब नही...

गुफ्तगू (4)

मेरे कारनामा-ऐ-जिंदगी मेरी हसरतों के सिवा कुछ नहीं...
यह किया नहीं...वो हुआ नहीं...यह मिला नहीं...वो रहा नही......

Dec 6, 2014

चलते चलते (13)

ना जाने कौन मेरे हक में दुआ पढ़ता है
डूबता भी हु तो समन्दर उछाल देता है…

Nov 20, 2014

चलते चलते(12)

"कुछ अजीब हैं राहें, जिनपर चल रहें हैं हम.... हर नये
मोड़ पर लगता हे, बदल रहे हैं हम...!"

Nov 15, 2014

गुफ्तगु (2)

था कभी प्यार का हसीन मौसम तेरे शहर में
आज किस बात का है मातम तेरे शहर में...
हर कोई खुश है बेहिसाब मेरे क़त्ल के बाद
क्यूँ क़ातिल मना रहा है ग़म तेरे शहर में...
शीशे तो खौफ खाते ही हैं पत्थरों से लेकिन
पत्थरों का क्यूँ निकला है दम तेरे शहर में...
नज़दीक से गुज़र गया वो ज़ख्म दिए बगैर
शायद बाकी है पत्थरों में शरम तेरे शहर में...
इंसानियत की पीठ में घोंपे मज़हबों के खंज़र
लोग करते रहे अल्लाह पे सितम तेरे शहर में...
ये मत समझ लेना इक मौत से डर गया हूँ मैं
लेकर आऊँगा फिर अगला जनम तेरे शहर मै...