Apr 8, 2021
इक रोज हम मिलेंगे
Mar 16, 2021
नानी
Jan 6, 2021
हिसाब कौन देगा ??
उन आधी अधूरी मुलाकातों का
उन अनकहे जज्बातों
का
दिल में रह गयी उन तमाम बातों का
तेरी याद में तनहा बितायी रातों का
हिसाब कौन देगा । (1)
साथ बिताये लम्हे को
याद करती करवटों का
आंसुओं से तकिये पे
पड़ी सलवटों का
आज भी मुझे महसूस
होती तेरे पैरों की आहटों का
मुझे तोहफे में मिली
इन खोखली मुस्कुराहटों का
हिसाब कौन देगा ।(2)
सर पे छाये इस जूनून का
सालों से जुदा उस सुकून का
उस हर झटककर छोड़े हाथ का
मंजिल से पहले छूटे साथ का
हिसाब कौन देगा ।(3)
तेरे साथ देखे मेरे
हर अधूरे सपने का
तेरे कारण बिछड़े हर
अपने का
उन बे -जुबान सवालों का
आज भी मुझे
महकाते तेरे ख़यालों का
हिसाब कौन देगा ।(4)
साथ खायी जीने मरने
की कसमों का
मोहब्बत की निभाई उन सारी रस्मों का
मेरी हर वफ़ा का,तेरी हर जफ़ा का
तुझे पाने के लिए
मांगी उन दुआओं का
हिसाब कौन देगा ।(5)
आज तक गूंजती तेरी
पायल की छनछन का
मेरी माँ के दिए उस कंगन का
तूने जान बूझकर की
उस आखिरी अनबन का
मेरा नसीब बन गयी इस
उलझन का
हिसाब कौन देगा (6)
वो सिगरेट की लगी लत
का
तेरी जुदाई में लगी
हर बुरी आदत का
तन्हाई की इस सुहबत का
उस पाक़ीज़ा मोहब्बत
का
हिसाब कौन देगा(7)
तूने जो जलाये मेरे उन सभी खतों का
मेरे साथ बिताये उन सभी रतजगों का
तेरी खुशहाल शादी का
और मेरी इस बर्बादी का
हिसाब कौन देगा ।(8)
Jan 5, 2021
पापा
कंधे पे बिठा के मेला दिखाने ले जाते थे पापा
रात में कितने भी थके हों पर कहानी जरूर सुनाते थे पापा
मेरी हर जीत पे मोहल्ले में मिठाई बंटवाते थे पापा
फिर हर हार पे हिम्मत भी बंधाते थे पापा
छोटी से छोटी जीत को भी त्यौहार सा मनाते थे पापा
बड़ी से बड़ी हार पे भी पीठ थपथपाते थे पापा
खुद तंगहाल रह मुझे नए कपडे दिलवाते थे पापा
मेरी गलतियों पे मुझे डांटते थे पापा
पर मैं जब रूठ जाऊँ तो खुद ही मुझे मनाते थे पापा
फ़ोन पे कहते मम्मी से बात कर लिया करो याद करती है
पर खुद कितना याद करते हैं ये कभी न बताते थे पापा
पूरे मोहल्ले के सामने मुझे अपनी शान बताते थे पापा
मैं उनकी कमजोरी और मेरी ताक़त थे पापा
कल पापा को देखा तो लगा क्या बूढ़े हो रहे हैं पापा
क्या कभी बूढ़े भी होते हैं पापा ??
Dec 9, 2020
राहुल सांकृत्यायन -गुणाकर मुले
- सैर कर गाफिल दुनिया की जिंदगानी फिर कहाँ , जिंदगानी गर कुछ रही तो नौजवानी फिर कहाँ।
- छह महीने का कुत्ता और बारह बरस का पुत्ता। हुआ सो हुआ गया सो गया।
लामाओं के देश में
- घंटे कितने ही क्यों न हों, समय ठहरता थोड़े ही है।
- डर का कारण मालूम हो जाने डर आधा ही रह जाता है।
- तीर्थयात्रा सहज नहीं होती।
- पृथ्वी में ऐसा कौन सा काम है जो प्रयत्न करने से सफल नहीं हो सकता।
- जितना महत्वपूर्ण हिन्दुओं के लिए काशी मुसलमानों के लिए मक्का है उतना ही महत्वपूर्ण तिब्बतियों के लिए ल्हासा है।
विस्मृत यात्री
- लोगों को पढ़ने का शौक़ीन होना चाहिए उससे ज्ञान की वृद्धि होती है।
- सामाजिक रूढ़ियों के कारन कितनी ही बातें जो एक देश में चलती हैं दुसरे देश एम् वर्जित होती हैं
- आदमी पहली यात्रा के लिए जब कदम उठाता है तो उसे कहाँ मालूम होता है की इसका अंत कहाँ होगा।
- मनुष्य की बाल - स्मृति सबसे मधुर होती है
- शाश्त्र पढ़ने से आदमी की ऑंखें खुलती हैं पर उसकी कूपमंडूकता दूर करने के लिए देशाटन भी आवश्यक है।
- परिचित होकर ही हम जान सकते हैं कि किस तरह देश और समाज में परिवर्तन हुआ करते हैं।
- अगर दुःख अकारण होता तो उसे हटाने का प्रयत्न करना बेकार होता।
- युद्ध भी एक भीषण महामारी है , जिसके आने पर बस्तियां उजाड़ जाती हैं।
- विद्या का आकर्षण घुमक्कड़ी से कम नहीं।
- सभी जगह लोगों की भावनायेँ लगभग एक जैसी होती हैं।
- मनुष्य प्रकृति से कोमल और उदार हृदय का है पर परिस्थितियां बना देती हैं।
- आदमी अपने संस्कार और ज्ञान के अनुसार देवताओं को अपनाता है।
- दुनिया की विचित्रता एक जगह रह रहे आदमी को नहीं मालूम होती।
- आदमी जितना अधिक पृथ्वी का पर्यटन करता है उतना ही अधिक उसकी ज्ञान के विस्तार के साथ जिज्ञासा में भी विस्तार होता है।
- लिपि ही है जो सब जगह एक जैसी समझी जाती है।